मां के कहने पर खेलने लगा क्रिकेट, IPL के पहले ही मैच में मचा दिया धमाल

इस लेख में हम आपको एक ऐसे भारतीय क्रिकेटर के बारे में बताने जा रहे हैं जो पढ़ने लिखने में काफी होशियार था और पढ़ लिखकर ही अपना करियर बनाना चाहता था परंतु संजोग से उस क्रिकेटर की मां ने उसको पढ़ाई छोड़कर क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया और आज वह बहुत बड़ा क्रिकेटर बन गया। जी हां दोस्तों आमतौर पर हम देखते हैं कि बच्चे के माता-पिता उसे खेलने कूदने से रोकते हैं और पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करते हैं लेकिन इस मामले में उल्टा है।

हम बात कर रहे हैं इंडियन प्रीमियर लीग में कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम से खेलने वाले ऑलराउंडर क्रिकेटर वेंकटेश अय्यर की। वेंकटेश अय्यर का जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था। वेंकटेश बचपन से ही पढ़ने लिखने में काफी होशियार थे और वे पूरी एकाग्रता के साथ अपनी पढ़ाई करते थे। इसके साथ ही व्यंकटेश खेलने कूदने में भी काफी माहिर थे। वेंकटेश अपनी उम्र के 10 वर्ष से ही क्रिकेट खेलने लगे थे। वेंकटेश अपनी गली के बच्चों के साथ ही लोकल क्रिकेट खेला करते थे। धीरे-धीरे क्रिकेट में उनकी रुचि बढ़ती गई और उन्होंने बाद में क्रिकेट प्रैक्टिस के लिए अकादमी ज्वाइन कर ली।

वेंकटेश ने अपनी बीकॉम की पढ़ाई पूरी की और वे चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई करने लगे। चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई करते समय जब फाइनल ईयर पहुंचे तो उनके सामने दो ऑप्शन थे। या तो वे क्रिकेट की तरफ जा सकते थे या फिर अपनी सीए की फाइनल ईयर की पढ़ाई कर सकते थे। इस समय उनकी मां उनके लिए निर्णायक बनी और उसकी मां ने उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए कहा। वेंकटेश की मां के द्वारा दिया गया निर्णय इसकी जीवन का सबसे सफल निर्णय साबित हुआ।

वेंकटेश ने बताया की “मैंने क्रिकेट मेरी मां के कहने पर खेलना शुरू किया। शायद उन्हें यह चिंता थी कि सारा दिन घर में पढ़ाई करने से मेरे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। मेरी मां ने मुझे क्रिकेट खेलने के लिए हमेशा प्रेरित किया। आज यहां तक मैं अपनी मां की वजह से पहुंचा हूं।” व्यंकटेश का प्रथम श्रेणी में खेला जाना तय माना जा रहा था। क्योंकि वे मध्यप्रदेश के लिए टी-20 और एकदिवसीय मैच खेल चुके थे। इसके बाद वेंकटेश ने एमबीए में एडमिशन ली और एमबीए की पढ़ाई भी पूरी लगन से करने लगे। वेंकटेश पढ़ाई और क्रिकेट दोनों साथ-साथ करने लगे। जब वे पढ़ाई करते थे तो पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई भी करते थे और जब क्रिकेट खेलते थे तो पूरी एकाग्रता के साथ खेलते थे।

आगे चलकर व्यंकटेश अय्यर मध्य प्रदेश की रणजी मैच के कप्तान बनाए गए। जिसके बाद साल 2015 मैं उन्होंने घरेलू मैच खेलना शुरू किया और साल 2018 से अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू किया। साल 2021 में तो व्यंकटेश अय्यर पूर्ण तरह से छा गए। उन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में कुल 5 मैचों में 75.66 की औसत से 277 रन बनाए। इसके बाद वेंकटेश अय्यर ने विजय हजारे ट्रॉफी में 146 गेंद में 198 रन बनाकर सबको चौंका दिया। इसके बाद आईपीएल की कुछ फ्रेंचाइजीयो की नजर उन पर पड़ी और उन्हें कोलकाता नाइट राइडर्स में शामिल कर लिया गया।

वेंकटेश ने अब तक 10 फर्स्ट क्लास मैसेज के लिए जिनमें 15 इनिंग में उन्होंने 545 रन बनाए और 7 विकेट चटकाए। वही लिस्ट ए में उन्होंने 24 मैच खेली जिनमें उन्होंने 849 रन बनाए। इसके अलावा व्यंकटेश अय्यर T20 मैच में भी खेल चुके हैं। T20 मैं व्यंकटेश अय्यर ने अभी तक 39 मैच खेली है और कुल 765 रन बनाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने 2 अर्धशतक भी बनाए हैं। व्यंकटेश ने अब तक 21 विकेट लिए है। व्यंकटेश जैसे खिलाड़ियों कि आज भारतीय क्रिकेट टीम सख्त आवश्यकता है।

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