पाँव से विकलांग और पिता को भी कैंसर, इस तरह रिक्शा चलाकर जिम्मेदारी निभा रही बेटी

हमनने कई लोगो को ऐसा कहते और बोलते हुए सुना है कि बेटा चाहिए क्योंकि बेटा उनकी जिदंगी की बहुत सी जरूरते पूरी करेगा और उनका बुढापे में सहारा भी बनेगा लेकिन आज हम आपको एक ऐसी बेटी के बारे में बताने जा रहे है जिसके बारे में जानकर के आप उसे सलाम करेंगे और कहेंगे कि एक बेटी अंकिता जैसी तो जरुर होनी ही चाहिये. ये है अंकिता शाह जिनका एक पाँव पोलियो के करण काटना पड गया था जिसके बाद से उनकी जिन्दगी दूभर हो गयी थी लेकिन उन्होने जीना सीख लिया था.

यही नही अंकिता ने कॉल सेंटर में नौकरी कर कुछ पैसा कमाना भी शुरू किया और सब नार्मल चल रहा था लेकिन तभी अंकिता की जिदंगी में कुछ ऐसा हुआ जिसकी उन्होंने कल्पना भी नही की थी. उनके पिता को कैंसर हो गया जिसका इलाज करवाने उन्हें बार बार सूरत जाते रहना पड़ता था.

अब ऐसे में अंकिता को न तो कॉल सेंटर वाले उतनी छुट्टी देते थे और न ही तनख्वाह बढाते थे जिसके चलते अंकिता को ये नौकरी छोडनी पड़ी और फिर एक रिक्शा ले लिया जो ख़ास तौर पर विकलांगो के लिए बना था. एक दोस्त की मदद से अंकिता ने न सिर्फ ये रिक्शा चलाना सीखा बल्कि अब वो दिन में 8 घंटे ये रिक्शा चलाती भी है.

यूँ करके अंकिता महीने में लगभग 20 हजार रूपये कमा लेती है और अपने पिता का इलाज करवाने के लिए जब चाहे तब रिक्शा रखकर क छुट्टी भी ले लेती है जिससे वो अपनी सारी जिम्मेदारियां निभा पा रही है. एक इस तरह की बेटी वाकई में एक मिसाल होती है जो कही न कही सीख देती है कि बेटियाँ आज की तारीख में किसी से भी कम तो बिलकुल भी नही है क्योंकि वो फर्ज निभाने पर आ जाए तो किसी भी ज्यादा निभाती है.

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