वो आईपीएस ऑफिसर जिसके पास एक गाडी या घर तक नही, कभी शक्ल देख भगा देते थे लोग

भारत ऐसा देश है जो अपने आप में विविधताओ से भरा हुआ है और जितनी यहाँ पर विविधता है उससे भी कई ज्यादा यहाँ पर संघर्ष की कहानियाँ है और उनमे से एक है रोबिन हिबू की जो इस देश के सबसे सम्मानित आईपीएस अफसरों में से एक है और चर्चित भी खूब है. रोबिन हिबू किसी बड़े या फिर संपन्न परिवार से नही थे और न ही देश के किसी खास या बड़े शहर से.

उनका जन्म हुआ था अरुणाचल प्रदेश के होन्ग नाम के गाँव में जो चीन की सीमा के नजदीक पड़ता है और यहाँ पर बुनियादी चीजे तक नही थी. पिता लकड़हारे थे और लकड़ी के घर में ही रहते थे लेकिन क्योंकि रोबिन पढने में अच्छे थे तो जैसे तैसे स्कूले शिक्षा कर ही ली. रोबिन इसके बाद दिल्ली गये जहाँ पर भी उन्हें कई बार भेदभाव का सामना करना पड़ा.

एक बार जब वो ट्रेन में सफ़र कर रहे थे तब फौजियों का एक समूह आया और उन्हें उनकी ही सीट से उठाकर दूर कर दिया और उनका सामान टॉयलेट के पास फेंक दिया. पुलिसकर्मी से रास्ता पूछा तो उनका नाक नक्श देख उन्हें ही भगा दिया. इन सबके बीच जेएनयू में आसरा मिला और वही पर ही पढ़ाई की और मेहनत इस हद तक की कि आईपीएस अफसर बन गये और आज देश के सम्मानित लोगो में शुमार है.

उनके पास में आज भी अपनी गाडी और घर नही है. गाँव में जो लडकी का घर था वहाँ पर भी म्यूजियम बना दिया है जिसमे वो गांधी जी के बारे में बताते है. वो अपने आप को गांधी प्रेमी कहते है. दो बार राष्ट्रपति मैडल से भी सम्मानित किये जा चुके है लेकिन कभी भी उन्होंने सम्पति का मोह नही रखा और हमेशा एक इमानदार जीवन जीते रहे जो कही न कही गर्व करवाता है.

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